हरिद्वार। मातृसदन आश्रम। गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए आंदोलन चलाने के लिए प्रख्यात हुई। लेकिन अब संस्था के प्रमुख व्यक्ति विशेष को टारगेट कर उन्हें बदनाम करने वाली छवि बन गई है। उन्हें हर कोई अधिकारी बेईमान लगता है और प्रदेश के हर मुखिया यानि मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। संस्था के सदस्यों को कोई भी उकसाकर अपना मतलब निकालने के लिए उपयोग करने लगे हैं। हालांकि शहर के विधायक के पास अरबों की संपत्ति कहां से आई, इन्होंने कभी उस पर सवाल नहीं उठाया। और न ही इन्हें गंगा के किनारे बन रहे रिजॉर्ट, होटल और तमाम व्यवसायिक निर्माण नजर नहीं आए। इन्हें केवल एक निर्माण अवैध दिखाई देता है।

मातृसदन संस्था के प्रमुख के साथ उनके सहयोगी कई संतों ने गंगा आंदोलन चलाकर गंगा को प्रदूषित होने से बचाने में अह्म भूमिका निभाई और इसके लिए संतों का बलिदान तक हो गया। अवैध खनन को रोकने के लिए लगातार आंदोलन किए, लेकिन जब नहीं रुका तो हाईकोर्ट की शरण में जाकर गंगा के किनारे के सभी स्टोन क्रशर बंद करा दिए। हालांकि इससे खनन सामग्री महंगी हो गई।
मातृसदन ने हमेशा प्रदेश के हर मुखिया पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के आरोप लगाए। प्रदेश में किसी का भी विकास कार्य इन्हें नहीं दिखाई दिया। हरिद्वार जनपद में जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के साथ एसडीएम हो या खनन से जुड़ा सचिव से लेकर हर अधिकारी, इन्होंने सभी पर गंभीर आरोपों की झडी लगाकर उनकी साख पर उंगली उठाने का काम किया।
यहां तक की हर किसी की संपत्ति, घर पर आरोप लगाया। लेकिन इन्हें कभी शहर विधायक की अरबो की संपत्ति का कभी पता नहीं चला। जिसने पूरे शहर के साथ अन्य प्रदेशों एवं विदेशों में भी संपत्ति अर्जित कर ली। इन्हें केवल एक व्यक्ति विशेष को टारगेट करने की आदत है।

अब तो मातृसदन पारिवारिक विवादों में भी मोहरा बनने लगा है। इन्हें केवल एक व्यक्ति विशेष द्वारा काटी गई कॉलोनी ही नजर आई। क्योंकि एक पक्ष ने अपने फायदें के लिए इन्हें आगे कर खूब इस्तेमाल किया। जिन्हें मातृसदन के प्रमुख समाजसेवी, पर्यावरणविद के नाम से पुकार रहे हैं, उन्हें केवल एक ही व्यक्ति मिला। अब इनके कारण एक ही गांव के दो परिवार तबाह होने के कगार पर खड़े हैं। उनमें दुश्मनी इतनी करा दी गई है कि वे एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के लोगों की जान लेने के लिए गोली चला दी। मातृसदन अभी भी गोली चलाने वालों की ढाल बन रहे हैं। उनकी ढाल बनने का नाकाम प्रयास कर रहे हैं।
मोहरा बनकर करते हैं बदनाम
चर्चा यहां तक है कि इन्हें मोहरा बनाने का काम किसी हरिद्वार के बड़े नेता करते हैं। जो इस बड़े नेता के खिलाफ होता है, या अधिकारी उसके अवैध कार्यों को नहीं करता, उसके पीछे मातृसदन को चिपका दिया जाता है। इन्हें बड़े नेता की पार्टनरशिप में एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी हुआ छात्रवृत्ति घोटला नजर नहीं आता। तमाम अवैध निर्माण शहर में खड़े करवा दिए गए। उसकी संपत्तियों पर कभी आरटीआई नहीं लगाई या शिकायत तक नहीं की। जबकि उसके अवैध निर्माण आज भी बदस्तूर है।

